Aankhe Bolti Hai


Aankhe Bolti Hai

Aankhe Bolti Hai(paperback)

Author : Dr Ram Bahadur Vyathit
Publisher : Uttkarsh Prakashan

Length : 108Page
Language : Hindi

List Price: Rs. 150

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माँ वागीश्वरी की स्नेहिल कृपा-दृष्टि विरले ही किसी साधक को मयस्सर होती है- और फिर एक चमत्कार होता है। अन्तस्तल में भावों की उत्ताल तरंगें उमड़ने लगती हैं, कल्पना का पंछी दूर व्योम में उड़ने लगता है और भावों की स्रोतस्विनी पर्वत का वक्ष फोड़कर बह निकलती है- कभी काव्य-मन्दाकिनी के रूप में, कभी कथा साहित्य के सृजन के पथ पर तो कभी निबन्ध-लेखन, उपन्यास विधा, रिपोर्ताज, संस्मरण और रेखाचित्र के रूप में वह अमूर्त संचेतना साकार होकर प्रस्फुटित हो उठती है और साहित्य-सृजन की मृत-स्यन्दिनी धारा प्रवाहित होने लगती है। वस्तुतः यह श्रम-साध्य उपलब्धि नहीं है- यह दिव्य प्रेरणा से ही संभव होता है। अनमोल रत्नों के साथ कभी-कभी निस्तेज प्रस्तर-खण्ड भी सम्मान पा जाते हैं। प्रारम्भ से ही मेरी अन्तः प्रवृत्ति गद्य-लेखन एवं कथा-सृजन की ओर अधिक उन्मुख रही है। माँ वीणापाणि के आशीर्वाद से मेरा प्रथम लघुकथा-संग्रह ‘देवदासी’ सन् 2006 में प्रकाशित हुआ। इन बारह वर्षों के अन्तराल में शताधिक लघु कथाओं का सृजन हुआ। ”आँखें बोलती हैं“ संग्रह में अपनी चुनिन्दा 80 लघु कथाओं का गुलदस्ता सुधी, मर्मज्ञ एवं सुविज्ञ पाठकों की झोली में सौंप रहा हूँ। आशा है, मेरे इस अकिंचन प्रयास को आपका स्नेहिल आशीष अवश्य प्राप्त होगा। कहानी का कैनवास विस्तृत होता है। उसमें एक जीवन्त चित्र अपने पूर्ण आयाम के साथ प्रकट होता है। लघु कथा एक मार्मिक अनुभूति की लात्मक अभिव्यक्ति है, जिसका आकार संक्षिप्त, घटना-क्रम सीमित और कथानक भी सांकेतिक होता है। लघु कथा किसी मार्मिक घटना को न्यूनतम शब्दों में व्यक्त करने की कला है। यही कारण है- लघु कथा हृदय पर सीधा प्रहार करती है, मर्म को स्पर्श करके मानों व्योम में उड़ जाती है- पीड़ा के समाधान के लिए। हमारे सरल जीवन में अचानक कोई ऐसी दर्दनाक घटना, कोई ऐसा मार्मिक प्रसंग घटित हो जाता है, जो अन्तर्मन में असह्य टीस उत्पन्न करता है। मैंने उस उभरती टीस पर मरहम लगाने का काम किया है। यह मरहम मानव-मन में उभरते दंश को भरने में सक्षम हो- यही मेरी मंगल कामना है। ये लघु कथाएँ मेरे भावुक मन की छटपटाहट हैंμ मेरे नेत्रों में छिपे आँसुओं का प्रतिबिम्ब है या विद्रूपताओं से जूझ रहे एकाकी मानव-मन के प्रति मेरी संवेदनाएँ हैं। ये संवेदनाएँ... ये छलकते आँसू... यह मन में उमड़ता उद्रेक... यही मेरी अनमोल निधि है- जिसने मेरे साहित्य-सृजन को अनन्त ऊर्जा और सरस संप्रेषणीयता प्रदान की है। मेरी अस्त-व्यस्त लघु कथाओं को समेटकर उन्हें एक संग्रह का रूप प्रदान करने वाले मेरे परम स्नेही मित्र डाॅ0 इसहाक़ ‘तबीब’ हैं जिनकी सतत् प्रेरणा, अथक परिश्रम एवं स्नेहिल संबल से यह संग्रह प्रकाशित हो सका है। आशा है मेरी यह भावपूर्ण पुष्पा´जलि ”आँखें बोलती हैं“ सुधी, मर्मज्ञ एवं सुविज्ञ पाठकों को आह्लादित करेगी। आपकी स्नेह-सिक्त प्रतिक्रिया एवं आपके पावन आशीर्वचन मेरे सृजन का पथ प्रशस्त करेंगे। जयतु भारत भारती। डाॅ0 राम बहादुर ‘व्यथित’

Specifications of Aankhe Bolti Hai (Paperback)

BOOK DETAILS

PublisherUttkarsh Prakashan
ISBN-10978-93-88155-38-0
Number of Pages108
Publication Year2018
LanguageHindi
ISBN-13978-93-88155-38-0
Bindingpaperback

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